प्रार्थना और वचन के बारे में बाइबल पद

परमेश्वर ने अपने लोगों को अपने साथ संगति के दो महान साधन दिए हैं: वह अपने वचन में हमसे बोलता है, और हम प्रार्थना और स्तुति में उससे बोलते हैं। तेरा वचन मेरे पाँवों के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है। ये वचन प्रार्थना, आराधना, और पवित्रशास्त्र से ली गई बुद्धि का जीवन प्रज्वलित करते हैं।

प्रार्थना

प्रार्थना — फिलिप्पियों 4:6

किसी भी बात की चिन्ता मत करो; परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और विनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख उपस्थित किए जाएँ।

मध्यस्थता की प्रार्थना — 1 तीमुथियुस 2:1

अब मैं सबसे पहले यह आग्रह करता हूँ, कि विनती, प्रार्थना, निवेदन, धन्यवाद, सब मनुष्यों के लिये किए जाएँ।

प्रार्थना में लगे रहना — लूका 18:1

फिर उसने इसके विषय में कि नित्य प्रार्थना करना और साहस नहीं छोड़ना चाहिए उनसे यह दृष्टान्त कहा:

पवित्रशास्त्र से प्रार्थना करना — यूहन्ना 15:7

यदि तुम मुझ में बने रहो, और मेरी बातें तुम में बनी रहें तो जो चाहो माँगो और वह तुम्हारे लिये हो जाएगा।

परमेश्वर की दोहाई देना — भजन संहिता 34:17

धर्मी दुहाई देते हैं और यहोवा सुनता है, और उनको सब विपत्तियों से छुड़ाता है।

विलाप — भजन संहिता 13:1

हे परमेश्वर, तू कब तक? क्या सदैव मुझे भूला रहेगा? तू कब तक अपना मुखड़ा मुझसे छिपाए रखेगा?

प्रार्थना में हियाव — इब्रानियों 4:16

इसलिए आओ, हम अनुग्रह के सिंहासन के निकट साहस बाँधकर चलें, कि हम पर दया हो, और वह अनुग्रह पाएँ, जो आवश्यकता के समय हमारी सहायता करे।

माँगो, ढूँढ़ो, खटखटाओ — मत्ती 7:7

“माँगो, तो तुम्हें दिया जाएगा; ढूँढ़ो, तो तुम पाओगे; खटखटाओ, तो तुम्हारे लिये खोला जाएगा।

निरन्तर प्रार्थना करो — 1 थिस्सलुनीकियों 5:17

निरन्तर प्रार्थना में लगे रहो।

विश्वास की प्रार्थना — याकूब 5:15

और विश्वास की प्रार्थना के द्वारा रोगी बच जाएगा और प्रभु उसको उठाकर खड़ा करेगा; यदि उसने पाप भी किए हों, तो परमेश्वर उसको क्षमा करेगा।

आत्मा में प्रार्थना करना — यहूदा 1:20

पर हे प्रियों तुम अपने अति पवित्र विश्वास में अपनी उन्नति करते हुए और पवित्र आत्मा में प्रार्थना करते हुए,

प्रभावशाली प्रार्थना — याकूब 5:16

इसलिए तुम आपस में एक दूसरे के सामने अपने-अपने पापों को मान लो; और एक दूसरे के लिये प्रार्थना करो, जिससे चंगे हो जाओ; धर्मी जन की प्रार्थना के प्रभाव से बहुत कुछ हो सकता है।

जब तुम प्रार्थना करो — मत्ती 6:6

परन्तु जब तू प्रार्थना करे, तो अपनी कोठरी में जा; और द्वार बन्द करके अपने पिता से जो गुप्त में है प्रार्थना कर; और तब तेरा पिता जो गुप्त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा।

प्रार्थना में एक मन होना — मत्ती 18:19

फिर मैं तुम से कहता हूँ, यदि तुम में से दो जन पृथ्वी पर किसी बात के लिये जिसे वे माँगें, एक मन के हों, तो वह मेरे पिता की ओर से जो स्वर्ग में है उनके लिये हो जाएगी।

आराधना और स्तुति

आराधना — यूहन्ना 4:24

परमेश्वर आत्मा है, और अवश्य है कि उसकी आराधना करनेवाले आत्मा और सच्चाई से आराधना करें।”

स्तुति — भजन संहिता 150:6

जितने प्राणी हैं सब के सब यहोवा की स्तुति करें! यहोवा की स्तुति करो!

धन्यवाद — भजन संहिता 100:4

उसके फाटकों में धन्यवाद, और उसके आँगनों में स्तुति करते हुए प्रवेश करो, उसका धन्यवाद करो, और उसके नाम को धन्य कहो!

भक्ति — भजन संहिता 95:6

आओ हम झुककर दण्डवत् करें, और अपने कर्ता यहोवा के सामने घुटने टेकें!

परमेश्वर के लिए गाना — भजन संहिता 96:1

यहोवा के लिये एक नया गीत गाओ, हे सारी पृथ्वी के लोगों यहोवा के लिये गाओ! (प्रका. 5:9, भज. 33:3)

श्रद्धा — इब्रानियों 12:28

इस कारण हम इस राज्य को पाकर जो हिलने का नहीं, उस अनुग्रह को हाथ से न जाने दें, जिसके द्वारा हम भक्ति, और भय सहित, परमेश्वर की ऐसी आराधना कर सकते हैं जिससे वह प्रसन्न होता है।

कृतज्ञ हृदय — कुलुस्सियों 3:16

मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने दो; और सिद्ध ज्ञान सहित एक दूसरे को सिखाओ, और चिताओ, और अपने-अपने मन में कृतज्ञता के साथ परमेश्वर के लिये भजन और स्तुतिगान और आत्मिक गीत गाओ।

आत्मा और सच्चाई से आराधना — यूहन्ना 4:23

परन्तु वह समय आता है, वरन् अब भी है, जिसमें सच्चे भक्त पिता परमेश्वर की आराधना आत्मा और सच्चाई से करेंगे, क्योंकि पिता अपने लिये ऐसे ही आराधकों को ढूँढ़ता है।

यहोवा को धन्य कहो — भजन संहिता 103:1

हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह; और जो कुछ मुझ में है, वह उसके पवित्र नाम को धन्य कहे!

जयजयकार करो — भजन संहिता 100:1

हे सारी पृथ्वी के लोगों, यहोवा का जयजयकार करो!

अपने हाथ उठाओ — भजन संहिता 134:2

अपने हाथ पवित्रस्थान में उठाकर, यहोवा को धन्य कहो।

स्तुति का बलिदान — इब्रानियों 13:15

इसलिए हम उसके द्वारा स्तुतिरूपी बलिदान, अर्थात् उन होठों का फल जो उसके नाम का अंगीकार करते हैं, परमेश्वर के लिये सर्वदा चढ़ाया करें। (भज. 50:14, भज. 50:23, होशे 14:2)

ऊँचे स्थानों में उसकी स्तुति करो — भजन संहिता 148:1

यहोवा की स्तुति करो! यहोवा की स्तुति स्वर्ग में से करो, उसकी स्तुति ऊँचे स्थानों में करो!

परमेश्वर का वचन

पवित्रशास्त्र — 2 तीमुथियुस 3:16

सम्पूर्ण पवित्रशास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धार्मिकता की शिक्षा के लिये लाभदायक है,

वचन को हृदय में रखना — भजन संहिता 119:11

मैंने तेरे वचन को अपने हृदय में रख छोड़ा है, कि तेरे विरुद्ध पाप न करूँ।

वचन की सामर्थ्य — इब्रानियों 4:12

क्योंकि परमेश्वर का वचन जीवित, प्रबल, और हर एक दोधारी तलवार से भी बहुत तेज है, प्राण, आत्मा को, गाँठ-गाँठ, और गूदे-गूदे को अलग करके, आर-पार छेदता है; और मन की भावनाओं और विचारों को जाँचता है। (यिर्म. 23:29, यशा. 55:11)

वचन पर मनन करना — यहोशू 1:8

व्यवस्था की यह पुस्तक तेरे चित्त से कभी न उतरने पाए, इसी में दिन-रात ध्यान दिए रहना, इसलिए कि जो कुछ उसमें लिखा है उसके अनुसार करने की तू चौकसी करे; क्योंकि ऐसा ही करने से तेरे सब काम सफल होंगे, और तू प्रभावशाली होगा।

वचन पर स्थिर रहना — मत्ती 24:35

आकाश और पृथ्वी टल जाएँगे, परन्तु मेरे शब्द कभी न टलेंगे।

मेरे पाँवों के लिए दीपक — भजन संहिता 119:105

तेरा वचन मेरे पाँव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है।

वचन सदा बना रहता है — यशायाह 40:8

घास तो सूख जाती, और फूल मुर्झा जाता है; परन्तु हमारे परमेश्वर का वचन सदैव अटल रहेगा । (1 पत. 1:24,25)

मधु से भी मीठा — भजन संहिता 119:103

तेरे वचन मुझ को कैसे मीठे लगते हैं, वे मेरे मुँह में मधु से भी मीठे हैं!

मनुष्य केवल रोटी से जीवित न रहेगा — मत्ती 4:4

यीशु ने उत्तर दिया, “लिखा है, ‘मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं, परन्तु हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुख से निकलता है जीवित रहेगा।’”

शुद्ध दूध की लालसा करो — 1 पतरस 2:2

नये जन्मे हुए बच्चों के समान निर्मल आत्मिक दूध की लालसा करो, ताकि उसके द्वारा उद्धार पाने के लिये बढ़ते जाओ,

वचन का बीज — लूका 8:11

“दृष्टान्त का अर्थ यह है: बीज तो परमेश्वर का वचन है।

वचन में बने रहो — यूहन्ना 8:31

तब यीशु ने उन यहूदियों से जिन्होंने उस पर विश्वास किया था, कहा, “यदि तुम मेरे वचन में बने रहोगे, तो सचमुच मेरे चेले ठहरोगे।

बुद्धि और विवेक

बुद्धि — याकूब 1:5

पर यदि तुम में से किसी को बुद्धि की घटी हो, तो परमेश्वर से माँगो, जो बिना उलाहना दिए सब को उदारता से देता है; और उसको दी जाएगी।

विवेक — इब्रानियों 5:14

पर अन्न सयानों के लिये है, जिनकी ज्ञानेन्द्रियाँ अभ्यास करते-करते, भले बुरे में भेद करने में निपुण हो गई हैं।

समझ — नीतिवचन 3:13

क्या ही धन्य है वह मनुष्य जो बुद्धि पाए, और वह मनुष्य जो समझ प्राप्त करे,

सम्मति — नीतिवचन 11:14

जहाँ बुद्धि की युक्ति नहीं, वहाँ प्रजा विपत्ति में पड़ती है; परन्तु सम्मति देनेवालों की बहुतायत के कारण बचाव होता है।

निर्णय लेना — नीतिवचन 16:9

मनुष्य मन में अपने मार्ग पर विचार करता है, परन्तु यहोवा ही उसके पैरों को स्थिर करता है।

अगुवाई — भजन संहिता 32:8

मैं तुझे बुद्धि दूँगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उसमें तेरी अगुआई करूँगा; मैं तुझ पर कृपादृष्टि रखूँगा और सम्मति दिया करूँगा।

परमेश्वर की इच्छा — रोमियों 12:2

और इस संसार के सदृश्य न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिससे तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो।

ज्ञान — नीतिवचन 1:7

यहोवा का भय मानना बुद्धि का मूल है; बुद्धि और शिक्षा को मूर्ख लोग ही तुच्छ जानते हैं।

ऊपर से आनेवाली बुद्धि — याकूब 3:17

पर जो ज्ञान ऊपर से आता है वह पहले तो पवित्र होता है फिर मिलनसार, कोमल और मृदुभाव और दया, और अच्छे फलों से लदा हुआ और पक्षपात और कपटरहित होता है।

बुद्धि प्राप्त करो — नीतिवचन 4:7

बुद्धि श्रेष्ठ है इसलिए उसकी प्राप्ति के लिये यत्न कर; अपना सब कुछ खर्च कर दे ताकि समझ को प्राप्त कर सके।

भरोसा रख, अपनी समझ पर मत झुक — नीतिवचन 3:5

तू अपनी समझ का सहारा न लेना, वरन् सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना ।

सब बातों को परखना — 1 थिस्सलुनीकियों 5:21

सब बातों को परखो जो अच्छी है उसे पकड़े रहो।

बुद्धि से चलो — कुलुस्सियों 4:5

अवसर को बहुमूल्य समझकर बाहरवालों के साथ बुद्धिमानी से बर्ताव करो।