आत्मा के फल और वरदान के बारे में बाइबल पद

आत्मा हम में अपना फल उगाता है — प्रेम, आनन्द, शान्ति, धीरज — और मसीह की देह को उन्नति देने के लिये वरदान देता है। जहाँ आत्मा कार्य करता है, वहाँ चरित्र बदलता है और कलीसिया दृढ़ होती है। ये वचन आपको आत्मा के साथ कदम मिलाकर चलने और उसकी सामर्थ में सेवा करने का निमन्त्रण देते हैं।

आत्मा का फल — गलातियों 5:22-23

पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, शान्ति, धीरज, और दया, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे-ऐसे कामों के विरोध में कोई व्यवस्था नहीं।

आत्मा के वरदान — 1 कुरिन्थियों 12:7

किन्तु सब के लाभ पहुँचाने के लिये हर एक को आत्मा का प्रकाश दिया जाता है।

संयम — गलातियों 5:23

नम्रता, और संयम हैं; ऐसे-ऐसे कामों के विरोध में कोई व्यवस्था नहीं।

आत्मिक सामर्थ्य — 2 तीमुथियुस 1:7

क्योंकि परमेश्वर ने हमें भय की नहीं पर सामर्थ्य, और प्रेम, और संयम की आत्मा दी है।

वरदानों से सेवा करना — 1 पतरस 4:10

जिसको जो वरदान मिला है, वह उसे परमेश्वर के नाना प्रकार के अनुग्रह के भले भण्डारियों के समान एक दूसरे की सेवा में लगाए।

अभिषेक — 1 यूहन्ना 2:27

और तुम्हारा वह अभिषेक, जो उसकी ओर से किया गया, तुम में बना रहता है; और तुम्हें इसका प्रयोजन नहीं, कि कोई तुम्हें सिखाए, वरन् जैसे वह अभिषेक जो उसकी ओर से किया गया तुम्हें सब बातें सिखाता है, और यह सच्चा है, और झूठा नहीं और जैसा उसने तुम्हें सिखाया है वैसे ही तुम उसमें बने रहते हो। (यूह. 14:26)

अनेक वरदान, एक आत्मा — 1 कुरिन्थियों 12:4

वरदान तो कई प्रकार के हैं, परन्तु आत्मा एक ही है।

प्रेम सबसे बड़ा वरदान — 1 कुरिन्थियों 13:13

पर अब विश्वास, आशा, प्रेम ये तीनों स्थायी हैं, पर इनमें सबसे बड़ा प्रेम है।

वरदानों की उत्कट अभिलाषा करो — 1 कुरिन्थियों 14:1

प्रेम का अनुकरण करो, और आत्मिक वरदानों की भी धुन में रहो विशेष करके यह, कि भविष्यद्वाणी करो।

वरदान को उभारो — 2 तीमुथियुस 1:6

इसी कारण मैं तुझे सुधि दिलाता हूँ, कि तू परमेश्वर के उस वरदान को जो मेरे हाथ रखने के द्वारा तुझे मिला है प्रज्वलित कर दे।

आत्मा को न बुझाओ — 1 थिस्सलुनीकियों 5:19

आत्मा को न बुझाओ।

एक देह, अनेक अंग — 1 कुरिन्थियों 12:12

क्योंकि जिस प्रकार देह तो एक है और उसके अंग बहुत से हैं, और उस एक देह के सब अंग, बहुत होने पर भी सब मिलकर एक ही देह हैं, उसी प्रकार मसीह भी है।