आनन्द के बारे में बाइबल पद

“यहोवा का आनन्द तुम्हारा बल है” (नहेमायाह 8:10)। बाइबल का आनन्द ख़ुशी से गहरा है—यह रोने में भी बना रहता, हानि से आगे टिकता, और भोर के साथ लौट आता है। ये पद दिखाते हैं कि वह आनन्द कहाँ से आता है और उसे फिर से कैसे पाया जाए।

01 नहेम्याह 8:10

फिर उसने उनसे कहा, “जाकर चिकना-चिकना भोजन करो और मीठा-मीठा रस पियो, और जिनके लिये कुछ तैयार नहीं हुआ उनके पास भोजन सामग्री भेजो; क्योंकि आज का दिन हमारे प्रभु के लिये पवित्र है; और उदास मत रहो, क्योंकि यहोवा का आनन्द तुम्हारा दृढ़ गढ़ है।”

02 भजन संहिता 16:11

तू मुझे जीवन का रास्ता दिखाएगा; तेरे निकट आनन्द की भरपूरी है, तेरे दाहिने हाथ में सुख सर्वदा बना रहता है। (प्रेरि. 2:25-28)

03 यूहन्ना 15:11

मैंने ये बातें तुम से इसलिए कही हैं, कि मेरा आनन्द तुम में बना रहे, और तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए।

04 फिलिप्पियों 4:4

प्रभु में सदा आनन्दित रहो; मैं फिर कहता हूँ, आनन्दित रहो।

05 गलातियों 5:22

पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, शान्ति, धीरज, और दया, भलाई, विश्वास,

06 भजन संहिता 30:5

क्योंकि उसका क्रोध, तो क्षण भर का होता है, परन्तु उसकी प्रसन्नता जीवन भर की होती है । कदाचित् रात को रोना पड़े, परन्तु सवेरे आनन्द पहुँचेगा।

07 रोमियों 15:13

परमेश्वर जो आशा का दाता है तुम्हें विश्वास करने में सब प्रकार के आनन्द और शान्ति से परिपूर्ण करे, कि पवित्र आत्मा की सामर्थ्य से तुम्हारी आशा बढ़ती जाए।

08 याकूब 1:2-3

हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो तो इसको पूरे आनन्द की बात समझो, यह जानकर, कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्पन्न होता है।

09 भजन संहिता 126:5

जो आँसू बहाते हुए बोते हैं, वे जयजयकार करते हुए लवने पाएँगे ।

10 1 पतरस 1:8

उससे तुम बिन देखे प्रेम रखते हो, और अब तो उस पर बिन देखे भी विश्वास करके ऐसे आनन्दित और मगन होते हो, जो वर्णन से बाहर और महिमा से भरा हुआ है,

11 यशायाह 12:3

तुम आनन्दपूर्वक उद्धार के सोतों से जल भरोगे।

12 भजन संहिता 32:11

हे धर्मियों यहोवा के कारण आनन्दित और मगन हो, और हे सब सीधे मनवालों आनन्द से जयजयकार करो!

13 हबक्कूक 3:18

तो भी मैं यहोवा के कारण आनन्दित और मगन रहूँगा, और अपने उद्धारकर्ता परमेश्वर के द्वारा अति प्रसन्न रहूँगा

14 रोमियों 14:17

क्योंकि परमेश्वर का राज्य खाना-पीना नहीं; परन्तु धार्मिकता और मिलाप और वह आनन्द है जो पवित्र आत्मा से होता है।

सदा आनन्दित रहो।

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