पापों की क्षमा के बारे में बाइबल पद
“यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह विश्वासयोग्य और धर्मी है कि हमारे पाप क्षमा करे” (1 यूहन्ना 1:9)। ये पद सुसमाचार का सबसे स्वच्छ वादा सामने रखते हैं: माने गए पाप क्षमा किए गए पाप हैं—पूरब से पश्चिम जितनी दूर हटा दिए गए, फिर कभी स्मरण न किए जाने वाले।
यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। (भज. 32:5, नीति. 28:13)
हमको मसीह में उसके लहू के द्वारा छुटकारा, अर्थात् अपराधों की क्षमा, परमेश्वर के उस अनुग्रह के धन के अनुसार मिला है,
जिसमें हमें छुटकारा अर्थात् पापों की क्षमा प्राप्त होती है।
उसकी सब भविष्यद्वक्ता गवाही देते है कि जो कोई उस पर विश्वास करेगा, उसको उसके नाम के द्वारा पापों की क्षमा मिलेगी। (यशा. 33:24, यशा. 53:5,6, यिर्म. 31:34, दानि. 9:24)
तेरे समान ऐसा परमेश्वर कहाँ है जो अधर्म को क्षमा करे और अपने निज भाग के बचे हुओं के अपराध को ढाँप दे? वह अपने क्रोध को सदा बनाए नहीं रहता, क्योंकि वह करुणा से प्रीति रखता है। वह फिर हम पर दया करेगा, और हमारे अधर्म के कामों को लताड़ डालेगा। तू उनके सब पापों को गहरे समुद्र में डाल देगा।
उदयाचल अस्ताचल से जितनी दूर है, उसने हमारे अपराधों को हम से उतनी ही दूर कर दिया है।
यहोवा कहता है, “ आओ, हम आपस में वाद-विवाद करें: तुम्हारे पाप चाहे लाल रंग के हों, तो भी वे हिम के समान उजले हो जाएँगे; और चाहे अर्गवानी रंग के हों, तो भी वे ऊन के समान श्वेत हो जाएँगे।
और उसने तुम्हें भी, जो अपने अपराधों, और अपने शरीर की खतनारहित दशा में मुर्दा थे, उसके साथ जिलाया, और हमारे सब अपराधों को क्षमा किया। और विधियों का वह लेख और सहायक नियम जो हमारे नाम पर और हमारे विरोध में था मिटा डाला; और उसे क्रूस पर कीलों से जड़कर सामने से हटा दिया है।
क्योंकि मैं उनके अधर्म के विषय में दयावन्त होऊँगा, और उनके पापों को फिर स्मरण न करूँगा।”
“धन्य वे हैं, जिनके अधर्म क्षमा हुए, और जिनके पाप ढांपे गए। धन्य है वह मनुष्य जिसे परमेश्वर पापी न ठहराए।” (भज. 32:2)
और यरूशलेम से लेकर सब जातियों में मन फिराव का और पापों की क्षमा का प्रचार, उसी के नाम से किया जाएगा।
क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और जिसका पाप ढाँपा गया हो । (रोम. 4:7)
क्योंकि यह वाचा का मेरा वह लहू है, जो बहुतों के लिये पापों की क्षमा के लिए बहाया जाता है।
(फिर वह यह कहता है,) “मैं उनके पापों को, और उनके अधर्म के कामों को फिर कभी स्मरण न करूँगा।” (इब्रा. 8:12, यिर्म. 31:34) और जब इनकी क्षमा हो गई है, तो फिर पाप का बलिदान नहीं रहा।